RULES

गुरु दीक्षा लेने से पहले आवश्यक नियम जिनका आपने अंतिम श्वास तक पालन करना है

1. हुक्का, शराब, मास, तंबाकू, बियर, सिगरेट, हुल्लास सूंघना, अंडा, सुल्फा, अफीम, गांजा और अन्य नशीली वस्तुओं का सेवन तो दूर रहा किसी को नशीली वस्तु लाकर भी नहीं देनी है क्योंकि बुराई करना व उसमें सहयोग देना दोनों ही महापाप है और भक्ति मार्ग मैं विष के समान है |

2. किसी प्रकार का कोई व्रत तीर्थ गंगा स्नान आदि नहीं करना तथा किसी अन्य धार्मिक स्थल पर स्नानार्थ या दर्शनार्थ नहीं जाना है किसी मंदिर में पूजा व भक्ति के भाव से नहीं जाना की इस मंदिर मैं भगवान है भगवान कोई पशु तो नहीं है की उसको पुजारी जी ने मंदिर मैं बांध रखा है भगवान तो कण कण में व्यापक है उसके गुणों का लाभ लेने के लिए प्रथम गुरु बनाइए नाम लेकर सुमिरन करो तब आपको ईशवरीय लाभ प्राप्त होगा कबीर साहेब कहते हैं:-
कबीर पर्वत – पर्वत मैं फिरा कारण अपने राम

राम सरीखे जन मिले जिन सारे सब काम |

3. यदि किसी की मृत्यु हो जाती है तो उसके फूल आदि कुछ नहीं उठाने हैं ना पिंड भरवाने हैं ना तेरहामी करनी है ना छमाही, बर्षौदी, पितृ पूजा कोई भी समाधि पूजना श्राद्ध निकालना आदि कुछ नहीं करना है यह पांच तत्वों से बना शरीर तो एक वस्त्र की तरह है मूल वस्तु जीवात्मा है वह कर्म आधार पर नए शरीर में जा चुकी होती है हम अज्ञानियों द्वारा भ्रमित होकर पीछे क्रियाएं करते रहते हैं जो व्यर्थ है |

4.अन्य किसी देवी देवता की पूजा नहीं करनी है |

5. ऐसे व्यक्ति का झूठा नहीं खाना जो नशीले पदार्थों का सेवन करता हो |

6. जुआ ताश कभी नहीं खेलना |

7. किसी प्रकार के खुशी के अवसर पर नाचना व अश्लील गाने गाना सख्त मना है |

8.  अपने गुरुदेव जी की आज्ञा के बिना घर में किसी प्रकार का यज्ञ हवन धार्मिक अनुष्ठान नहीं करवाना है |

9छुआ छात नहीं करना है हम सब एक मालिक के बंदे हैं भगवान ने किसी भी जाति या मजहब धर्म के स्त्री-पुरुषों में कोई अंतर नहीं किया तो हम क्यों करें |

10. दहेज लेना और देना कुरीति है तथा मानव मात्र की अशांति का कारण है उपदेशी के लिए मना है जिसने अपने कलेजे की कोर पुत्री को दे दिया फिर बाकी क्या रहा |

11. वस्तु कला या ज्योतिष आदि के चक्कर में नहीं पड़ना प्रभु पर विश्वास रखें |

उपरोक्त नियमों में से किसी भी नियम का उल्लंघन कर दिया तो आप नाम रहित हो जाओगे